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Imported post: Facebook Post: 2024-09-07T17:15:32

जिस देश मे "हम" की व्यापक, बहुलतावादी और समाजवादी सोच पर "मै" की व्यक्तिवादी, अधिनायकवादी और संकीर्णतावादी प्रवृत्ति हावी हो, वहाँ राष्ट्र निर्माण की संभावना भी क्षीण होती है। "हम" मे प्रसार और विकेन्द्रीकरण की भावना अभिव्यक्त होती है, जबकि "मै " मे संकुचन और केन्द्रीकरण की प्रवृति होती है। समाज मे व्यक्ति की उपस्थिति होती है, पर व्यक्ति मे समाज अनुपस्थित होता है। राष्ट्रनिर्माण के लिए किसी निश्चित भूभाग के लोगो के बीच "समान्यता" की प्रबल भावना का विद्यमान होना सबसे महत्वपूर्ण शर्त होती है, जबकि "मै" समान्यता की इस भावना को खंडित करता है। व्यक्ति केन्द्रित राष्ट्र मे समाज की अनुपस्थिति होती है, या व्यक्ति के आगे समाज आत्मसमर्पण कर देता है। व्यक्ति मे समाज का विलयन अंततः अधिनायकवाद को जन्म देता है, जहाँ राष्ट्र एक व्यक्ति मे समाहित हो जाता है। ऐसी स्थिति मे राष्ट्र व्यक्ति द्वारा अपह्रत हो जाता है, और आमजनता अपनी आजादी को हमेशा के लिए गवां कर गुलाम बन जाती है। हम आजादी का प्रतीक है, वही मै गुलामी का। ......✍️ सर्वाधिकार सुरक्षित © मौलिक, स्वरचित #Eralokkumar #alokfbFamily #aloksir #Guddusingh #alok #princeofgaya #alokkumar #aloksingh #Facebook #engineer #MechanicalEngineer #Lifeskills #ईआलोककुमार #आलोक #आलोककुमार #आलोकसिंह #आलोकसर #जीवनशैली #जीवनोपयोगीशिक्षा #फेसबुक #GidhaIndustrialAreaAra #MIGH22HBColonyGaya #202PatliputraColonyPatna #AkanchaSingh #आकांक्षासिंह